“मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता,” यह वाक्य गौरव वल्लभ ने अपनी चिट्ठी में लिखा। और इसी कारण से वह कांग्रेस पार्टी छोड़ दी।

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By Gulam Mohammad

गौरव वल्लभ ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी दिशाहीन होकर काम कर रही है।

"मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता," यह वाक्य गौरव वल्लभ ने अपनी चिट्ठी में लिखा। और इसी कारण से वह कांग्रेस पार्टी छोड़ दी।

मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता, यह वाक्य गौरव वल्लभ ने अपनी चिट्ठी में लिखा। और इसी कारण से वह कांग्रेस पार्टी छोड़ दी।

गौरव वल्लभ का कांग्रेस से इस्तीफा लेना पार्टी को बड़ा झटका पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उन्हें सनातन विरोधी नारे नहीं लगाने की अनुमति नहीं है और इसलिए पार्टी में रहना मुश्किल है।

गौरव वल्लभ ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के अध्यक्ष मल्ल्कियर्जुन खरगे को इस्तीफे की फोटो सहित भेजा और लिखा, “कांग्रेस पार्टी जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें मैं खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा हूं। मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह-शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता। इस कारण मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहा हूं।”

उन्होंने खरगे को भेजे इस्तीफा पत्र में लिखा कि वे भावुक हैं और मन व्यथित है। वे कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन उनके संस्कार ऐसे कुछ कहने से रोकते हैं। फिर भी वे आपके सामने अपनी बातें रख रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सच को छुपाना भी अपराध है और वह अपराध का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

गौरव वल्लभ ने क्या कहा?
गौरव वल्लभ ने कहा कि जब मैंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी तो तब मेरा मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है. यहां पर युवा और बौद्धिक लोगों के आइडिया की क़द्र होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुझे यह महसूस हुआ कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप नये आइडिया वाले युवाओं के साथ खुद को एडजस्ट नहीं कर पाती.

राम मंदिर का किया जिक्र
गौरव वल्लभ ने कहा कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर कांग्रेस के रुख से मैं क्षुब्ध हूं. मैं जन्म से हिंदू और कर्म से शिक्षक हूं, पार्टी के इस स्टैंड ने मुझे हमेशा असहज किया. पार्टी और गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन के विरोध में बोलते हैं,

उन्होंने आगे कहा कि इन दिनों पार्टी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है. एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं तो वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं.

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