महात्मा गांधी से राज्यत्व आंदोलनों तक और ममता बनर्जी: कैसे भूख हड़ताल को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया

Photo of author

By Gulam Mohammad

भारतीय इतिहास में भूख हड़ताल एक शक्तिशाली राजनीतिक हथियार के रूप में प्रचलित है। यह एक ऐसा आधुनिक राजनीतिक विधान है जो सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक मांगों को उठाने के लिए अपनाया जाता है। महात्मा गांधी से लेकर आज की प्रमुख राजनीतिक नेताओं जैसे कि ममता बनर्जी तक, भूख हड़ताल को आंदोलनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।

महात्मा गांधी से राज्यत्व आंदोलनों तक और ममता बनर्जी: कैसे भूख हड़ताल को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया

महात्मा गांधी के समय में, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, भूख हड़ताल ने एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में काम किया। इसका उदाहरण गांधीजी की “नौवें अनशन” है, जो कानूनी असहमति के प्रति उनके आक्षेप को दर्शाता है। गांधीजी का यह अनशन ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ भारतीय जनता की आवाज को सुनाने का एक प्रयास था।

भारतीय इतिहास के बाद में, भूख हड़ताल को राजनीतिक आंदोलनों का महत्वपूर्ण और असंवेदनशील तरीका माना गया है। इसने राज्यवादी और राजनीतिक असहमति को व्यक्त करने का माध्यम प्रदान किया है।

ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, ने भी अपने नेतृत्व में कई बार भूख हड़ताल का सहारा लिया है। उनके आंदोलनों में भूख हड़ताल ने उनकी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मांगों को उठाने के लिए एक प्रमुख तरीका के रूप में काम किया है।

भूख हड़ताल का यह उपयोग आंदोलन की शक्ति को और भी मजबूत बनाता है, क्योंकि यह व्यक्तिगत तौर पर बड़ी भूख से जूझने का एक प्रतीक होता है और लोगों के ध्यान को आकर्षित करता है। इसके अलावा, यह एक प्रभावी तकनीक है जिससे नेता अपनी मांगों को प्रदर्शित कर सकते हैं और राजनीतिक दबाव बना सकते हैं।

समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को सुनने और उनकी मांगों को समझने के लिए भूख हड़ताल एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह एक ऐसा राजनीतिक और सामाजिक उपाय है जो सरकारों को सचेत करता है कि जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस तरह, भूख हड़ताल ने भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को अपने प्राचीनतम और सम्मानजनक धरोहरों में एक नई दिशा दी है, जो समाज में न्याय और समानता की मांगों को प्रकट करता है।

Leave a Reply

Discover more from Jai Bharat Samachar

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading