प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की नीतियाँ: लोकतांत्रिक या तानाशाही?

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By Sunil Chaudhary

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में उनकी नीतियों और शासन शैली को लेकर विभिन्न वर्गों में भिन्न-भिन्न राय व्यक्त की गई है। कुछ लोग मोदी की नीतियों को लोकतांत्रिक और विकासोन्मुखी बताते हैं, जबकि अन्य उन्हें अधिकारवादी और तानाशाहीपूर्ण मानते हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की नीतियाँ: लोकतांत्रिक या तानाशाही?

लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से, मोदी सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जो जन-भागीदारी और समावेशी विकास पर जोर देते हैं। डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और जन धन योजना जैसी पहल इसके उदाहरण हैं, जिन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने में मदद की है।

दूसरी ओर, आलोचक इस बात पर जोर देते हैं कि कुछ नीतियाँ और कार्यवाहियाँ, जैसे कि नोटबंदी, जम्मू और कश्मीर में धारा 370 का निरसन, और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू करना, ने विवाद और चिंताएँ उत्पन्न की हैं। इन कदमों को कुछ लोगों ने एकतरफा और तानाशाहीपूर्ण बताया है, जिससे समाज में विभाजन और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई है।

इस विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और शासन शैली का आकलन करना जटिल है। उनकी सरकार ने एक ओर जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ नीतियों ने विवाद और आलोचना को भी जन्म दिया है। अंततः, यह व्यक्तिगत दृष्टिकोण और विश्लेषण पर निर्भर करता है कि किसी को मोदी का शासन लोकतांत्रिक लगता है या तानाशाहीपूर्ण।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल का समग्र मूल्यांकन करते समय, यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी नीतियों और पहलों के माध्यम से भारत की लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोदी सरकार ने न केवल आंतरिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि में सुधार और उसकी स्थिति को मजबूत करने में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।

उनके शासन में, भारत ने डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, और आर्थिक सुधारों में कई महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिससे देश के विकास को एक नई दिशा मिली है। इसके अलावा, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनके प्रयासों ने भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है, जिससे विश्व स्तर पर देश की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है।

अतः, यह कहना उचित होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शासनकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा दिया है और अपनी नीतियों तथा पहलों के माध्यम से भारत की वैश्विक पटल पर छवि को सुधारा है। उनके दृढ़ नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों ने भारत को विकास की एक नई राह पर अग्रसर किया है, जिसका प्रभाव विश्व स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 से शासनकाल में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों की सूची:

  1. स्वच्छ भारत अभियान: इस अभियान का उद्देश्य भारत को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाना है। इसने लाखों शौचालयों के निर्माण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की।
  2. डिजिटल इंडिया: इस पहल का उद्देश्य देश में डिजिटल अवसंरचना का विकास करना और नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक पहुँच प्रदान करना है।
  3. मेक इन इंडिया: यह पहल भारत में निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई। इसने रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  4. जन धन योजना: इस योजना का उद्देश्य आर्थिक समावेशन सुनिश्चित करना है, जिससे देश के हर परिवार के पास कम से कम एक बैंक खाता हो।
  5. उज्ज्वला योजना: इस योजना के अंतर्गत, गरीब परिवारों को मुफ्त में LPG कनेक्शन प्रदान किए गए, जिससे उनके जीवन में सुधार हुआ।
  6. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST): यह एक महत्वपूर्ण कर सुधार है जिसने भारत में कर प्रणाली को सरल बनाया और एक एकीकृत बाजार स्थापित किया।
  7. आयुष्मान भारत: इस योजना का उद्देश्य देश के निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना है।
  8. बालाकोट एयर स्ट्राइक: 2019 में, भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर हवाई हमले किए, जिसने भारत के रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता का संदेश दिया।
  9. अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियाँ: चंद्रयान-2 और मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) जैसे मिशनों ने भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया।
  10. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दी गई, जिससे विश्व भर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ी।

प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में इन महत्वपूर्ण कार्यों और पहलों ने न केवल भारत के विकास को नई दिशा प्रदान की है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को भी सुधारा है।

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